इंतज़ार…

बिस्तर की सलवटों में कहीं छूट गया है
एक ख़्वाब जो आया ही नहीं, टूट गया है

जिस बुत को मैं खुदा बना के पूजता रहा
अब उसकी बंदगी से भरम टूट गया है

यूँ तो चला आया हूँ मैं जागीर छोड़ कर
एक नाम तो रिश्तों में कहीं छूट गया है

मैं इंतज़ार ही में रहा एक उम्र तक
ये सोचकर, वो आयेगा.. जो रूठ गया है

Advertisements